इस बार ग्रीन पटाखों से मनाये दिवाली , जानें बाज़ार में इन्हे कैसे पहचाने ?

    दिवाली आये और पटाखों की बात न हो , भला ये कैसे हो सकता है। दिवाली आते ही सोशल मीडिया पर लोग दो धड़ो में बट जाते है। एक तरफ पटाखों की बैन को लेकर मुहीम शुरू हो जाती है तो वही दूसरी ओर खूब पटाखे छोड़ने की बात कही जाती है। लेकिन इन सबके बीच एक और पर्सपेक्टिव यानी कि विचार भी मुख़र हो रहा है की अगर पटाखे जलाने ही है तो क्यों न ग्रीन पटाखे ही जलाये। आपने पिछले साल भी सुना होगा की कई राज्य समान पटाखों को जलाने की जगह ग्रीन पटाखों को जलाने की अनुमति दे रहे है। तो आइये जानते है की क्या चीज़ है आखिर ये ग्रीन पटाखे ? कैसे बनते है और आपकी जेब पर इसका कितना असर पड़ेगा।


    आपको बता दे कि ग्रीन पटाखों को बनाने में फ्लावर पॉट , पेंसिल , स्पार्कल्स और चक्कर का इस्तेमाल किया जाता है। तो इस तरह ग्रीन पटाखे पर्यावरण के अनुकूल होते है। बढ़ते प्रदुषण को देखते हुए इनका निर्माण किया जा रहा है।
    अब बात करते है नार्मल और ग्रीन पटाखों में क्या फ़र्क है ?
    नॉर्मल पटाखों में बारूद जैसे रसायन होते है जो जलाने पर फट जाते है और ज्यादा प्रदुषण फैलाते है जबकि ग्रीन पटाखों में हानिकारक केमिकल ना के बराबर होते है जिससे वायु प्रदुषण कम होता है। इनमे प्रदुषण के कई केमीकल्स जैसे अलुमिनियम , बोरियम , पोटैशियम नाइट्रेट और कार्बन या तो हटा दिए जाते है या तो 15 से 30 प्रतिशत तक कम कर दिया जाता है।
    अब बताते है कि कितने तरीके के होते है ग्रीन पटाखे …..
    आमतौर पर इनकी चार केटेगरी तय की गई है। जिनमे अलग अलग खूबी वाले पटाखों को रखा गया है।